जब स्मृति ईरानी ने मंत्री बनते ही बीच में ही छोड़ दी थी फ़िल्म, फ़िर एक महारानी को इस तरह से नचाना कैसे बर्दाश्त करे हम?


केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी अभिनेत्री रह चुकी है जिन्होंने बहुत से धारावाहिको के ज़रिये अपनी पहचान बनाई थी। लेकिन राजनीति का रुख़ करने के बाद वो अभिनय के क्षेत्र में ज़्यादा सक्रीय नहीं रही। लेकिन बहुत से कम लोग जानते है कि मोदी जी के कैबिनेट में मंत्री बनने से पहले स्मृति ईरानी अभिषेक बच्चन की फ़िल्म ऑल इज़ वेल में काम कर रही थी, पर केंद्र में भाजपा की सरकार बनते ही स्मृति ईरानी के मंत्री बनने की संभावनाएं भी बढ़ गयी थी। ऐसे में स्मृति ने बीच में ही ये फ़िल्म छोड़ दी, जिसका कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
शायद एक केंद्रीय मंत्री का यूँ फ़िल्मो में काम करना शोभा नहीं देगा, सोच कर ही स्मृति ने उस फ़िल्म से ख़ुद को किनारा कर लिया। बाद में वही रोल सुप्रिया पाठक ने निभाया था। गौरतलब है कि पद्मावती फ़िल्म पर चल रहे विवाद में स्मृति ईरानी ने निर्माता संजय लीला भंसाली को फ़िल्म की रिलीज़ के लिए आश्वस्त किया है, जबकि देशभर में फ़िल्म का विरोध किया जा रहा है।
फ़िल्म के पहले गाने घूमर पर भी विवाद खड़ा हो गया है कि एक महारानी इस तरह से भरी महफ़िल में कालबेलियों के साथ नृत्य नहीं किया करती थी। बहुत से हिन्दू संगठनो ने फ़िल्म के प्रति रोष व्यक्त किया है कि इस फ़िल्म के ज़रिये महासती पद्मनी की छवि को धूमिल करने के साथ ही इतिहास को भी गलत तथ्यों के आधार पर छेड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

अब सोचने वाली बात ये है कि जब एक केंद्रीय मंत्री का फ़िल्मो में काम करना शोभा नहीं देता तो फ़िर हिन्दू संगठन एक महारानी का किरदार निभा रही अभिनेत्री का इस तरह से नचाना कैसे बर्दाश्त कर ले? उमेश शुक्ला द्वारा निर्देशित फ़िल्म आल इज वेल में स्मृति ईरानी के साथ ऋषि कपूर, अभिषेक बच्चन और साथ आसीन मुख्य भूमिका में थे. स्मृति ईरानी के फ़िल्म छोड़ने के बाद पम्मी का किरदार सुप्रिया पाठक ने निभाया था और ये फ़िल्म 21  अगस्त 2015 को रिलीज़ हुयी थी.


फिल्म से जुडी ख़बरों को निचे दिए लिंक पर पढ़ सकते है

Comments

Popular posts from this blog

No One Cares: दो युवा, दो साल और 25 मिलियन फॉलोवर्स को प्रेरित करता फेसबुक परिवार

Nominations- Best Film: Semi-Annual Bollywood Awards 2017

आनंदपाल Encounter Case : ETV Rajasthan के Head श्रीपाल शक्तावत ने राजपूत समाज की जगह आखिर भाजपा को क्यों चुना?